उपन्यास- आँखों की दहलीज, उसका घर, कोरजा, अकेला पलाश; कहानी-आदम और हव्वा, टहनियों पर धूप, ग़लत पुरुष, फाल्गुनी, अंतिम चढ़ाई, विविध-म्हारी गोरी-सी हथेली में छाला पड़ग्यो मारू जी (बांछड़ा जाति की लड़कियों का विशेष अध्ययन):
उल्लेखनीय गतिविधियाँ / सहभागिता (Activities)
कहानियां धर्मयुग, हिन्दुस्तान, सारिका आदि राष्ट्रीय स्तर की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है। कुछ कहानियां मध्य प्रदेश, दिल्ली, आगरा, केरल के शिक्षा मंडल विश्वविद्यालय द्वारा पाठ्यक्रम में शामिल की गई हैं।
प्राय: सभी रचनाएं भारतीय भाषाओं में अनुदित हुई हैं। 1982-83 में उनके उपन्यास ‘उसका घर’, ‘आंखों की देहलीज’ कन्नड़ भाषा में प्रकाशित हुई है। पंजाब, मेरठ, जयपुर विश्वविद्यालयों में रचनाओं पर शोध कार्य हुआ है।
सन् 1995 में कहानियों ‘झूठन’, ‘सोने का बेसर’ और ‘फाल्गुनी’ पर दिल्ली दूरदर्शन ने धारावाहिक का निर्माण किया है। इसके अलावा स्वयं वेश्यावृ्त्ति पर ‘लाजो बिटिया’ 1997 में एवं निर्माण किया है।
वीरांगना रानी अवंतीबाई’ पर 1998 में धारावाहिक का निर्माण किया है।
सन् 1974 में बाल एवं परिवार कल्याण परियोजना, जिला बस्तर की अध्यक्ष रही। आकाशवाणी सलाहकार समिति की सदस्य, 1977 में बस्तर जिले की ओर से समाज कल्याण परिषद मध्य प्रदेश की सदस्य नियुक्त हुईं तथा जिले की महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रही हैं।
सम्मान व पुरस्कार (Awards & Honours)
1- 2005 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री अलंकरण।
2- 2003 में श्रेष्ठ पत्रिका समर के लिए रामेश्वर गुरु पुरस्कार ।
3- 1999 में राष्टÑभाषा स्वर्ण जयंती के अवसर पर हिन्दी भाषा और साहित्य के लिए लंदन में विश्व हिन्दी सम्मा।
4- 1995 में महात्मा गांधी के 125वीं जयंती पर रायपुर में सम्मानित।
5- 1995 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा साहित्य भूषण अलंकरण ।
6- 1980 में कोरजा उपन्यास पर उ?ार प्रदेश हिन्दी संस्थान एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा अखिल भारतीय महाराजा वीरसिंह देव पुरस्कार।