प्रो. ली जंग-हो
Asia

प्रो. ली जंग-हो

Prof. Li Jung-Ho

हांकुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़ के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर-विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत।
हांकुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़ (हिंदी विभाग)

व्यक्तिगत एवं संपर्क विवरण

नाम (हिंदी / English) प्रो. ली जंग-हो / Prof. Li Jung-Ho
वर्तमान पद / दायित्व हांकुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़ के हिंदी विभाग में प्रोफ़ेसर-विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत।
संस्थान / प्रतिष्ठान हांकुक यूनिवर्सिटी ऑफ़ फ़ॉरेन स्टडीज़ (हिंदी विभाग)
पता (Address) 107, Imun-ro, Dongdaemun-gu, Seoul, 130-791, Korea
ईमेल (Email) उपलब्ध नहीं / अप्रकट
दूरभाष (Phone) 82-2-2173-2063 82-2-2173-3387

प्रकाशन एवं शोध कार्य (Publications)

  • 1.आप कोरियाई छात्रों के लिए हिंदी व्याकरण, कोश, वार्तालाप और साहित्य संबंधी आठ पुस्तकों के अलावा भारतीय लोक कथाओं और बाल कहानियों के अनूदित संकलन तैयार कर चुके हैं।
  • 2.आपने भीष्म साहनी के सुप्रसिद्ध उपन्यास ‘तमस’ का कोरियाई अनुवाद किया है।
  • 3.आपने कोरियाई-हिंदी शब्दकोष का निर्माण भी किया है।

सम्मान व पुरस्कार (Awards & Honours)

  • 1.सन् 1996 में ट्रिनिडाड और टुबैगो में आयोजित पाँचवें विश्व हिंदी सम्मेलन में हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित।
  • 2.हिंदी के अध्ययन-अध्यापन में पिछले 30 वर्षों से निरंतर विनम्र भाव से संलग्न आप जो एक वरिष्ठ विद्वान हैं, आपको अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए 'डॉ. जॉर्ज ग्रियर्सन पुरस्कार' से सम्मानित करते हुए केंद्रीय हिंदी संस्थान गौरवान्वित।

विशेष विवरण / भाषाएँ / रुचियाँ (Other Details)

आपका जन्म जून 1948 में हुआ था। हिंदी के अंतरराष्ट्रीय पटल पर सन् 1981 से निरंतर सक्रिय प्रो. ली जंग हो एक ऐसे समर्पित हिंदी शिक्षक का नाम है जिन्होंने कोरिया में पहली बार हिंदी की ज़मीन तैयार करने का ऐतिहासिक कार्य किया। आपने हिंदी के प्रचार-प्रसार की हर चुनौती को पूरी रचनात्मक निष्ठा के साथ स्वीकार किया। अपने व्यक्तित्व और कृतित्व में महात्मा गांधी के कर्मठ आत्मानुशासन और लोकोपयोगी रचनात्मकता की गहराई से प्रभावित आपने महात्मा गांधी के व्यक्तित्व और कृतित्व पर आधारित एक दर्जन से भी अधिक शोध आलेखों की रचना की है।

सूचना स्रोत (Source)

http://wwwkhsindia.org/index.php?option=com_content&view=article&id=242: