स्व. सुश्री भानुमति नागदान/ Late Ms. Bhanumati Nagdaan
वर्तमान पद / दायित्व
अध्यापन कार्य
संस्थान / प्रतिष्ठान
पता (Address)
ईमेल (Email)
उपलब्ध नहीं / अप्रकट
दूरभाष (Phone)
उपलब्ध नहीं
शिक्षा एवं अकादमिक योग्यता (Education)
एस.सी. तथा ए.लेवल
प्रकाशन एवं शोध कार्य (Publications)
आपकी पहली रचना ‘बुढ़िया की शादी’ नामक गुजराती एकांकी है तथा पहली हिंदी रचना ‘ज़ख्म का चिन्ह’ है। आपकी तीन कहानी-संग्रह मिनिस्टर (1981), दरार (1993) तथा डॉन (Dawn) 2007-अंग्रेज़ी कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं।
उल्लेखनीय गतिविधियाँ / सहभागिता (Activities)
अनेकानेक सम्मेलनों/कार्यशालाओं में आपकी सक्रिय प्रतिभागिता।
सम्मान व पुरस्कार (Awards & Honours)
1.2013 में मॉरीशसीय हिंदी साहित्य शताब्दी के उपलक्ष्य पर विश्व हिंदी सचिवालय द्वारा आयोजित समारोह में ‘विश्व भाषा हिंदी’ सम्मान प्राप्त
2.साहित्य जगत के साथ-साथ आप समाज सेवा कार्यों में भी बहुत सक्रिय रहीं व आपको वर्ष 2006 में कात्र बोर्न नगरपालिका द्वारा मानद नागरिकता प्राप्त।
3.2003 में महात्मा गांधी संस्थान की ओर से हिंदी सम्मान प्राप्त
4.1993 में चौथे विश्व हिंदी सम्मेलन में सम्मानित किया गया
विशेष विवरण / भाषाएँ / रुचियाँ (Other Details)
1.देहांत : 18 नवंबर 2013
2.आप मॉरीशस में हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय व सम्मानित लेखिका रही हैं जिनकी लेखनी ने मॉरीशस के समाज, उसकी समस्याओं तथा विशेषकर इस देश की नारी के प्रति एक अत्यंत आधुनिक दृष्टिकोण उजागर किया (मॉरीशसीय हिंदी साहित्य में आपका आविर्भाव एक ऐसे समय में हुआ जब पूरा साहित्य जगत पुरुष प्रधान था, उन दिनों आप उन इनी-गिनी महिला लेखिकाओं में से थीं, जिन्होंने साहित्य रचना में पदार्पण किया। स्वभाव से साहसी, स्वाभिमानी व निडर भानुमति जी ने पूरी तटस्यता के साथ इस क्षेत्र में अपना स्थान बनाया। आपने समाज सुधार के कार्यों में बहुत निकटता से भाग लिया। आपके काव्यों में समाज का कोना-कोना झाँकता है। मॉरीशस के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक जीवन की स्थितियों और विसंगतियों को आपकी कहानियाँ प्रतिबिम्बित करती हैं)।
3.आपकी रचनाओं ने न केवल मॉरीशस में बल्कि भारत के साथ-साथ अन्य देशों में ख्याति प्राप्त की। हिंदी परिषद के अध्यक्ष स्वर्गीय श्री सोमदत्त बखोरी (मॉरीशस के प्रसिद्ध कवि) की प्रेरणा से आपने सर्वप्रथम रेडियो प्रोग्रामों के लिए एकांकी लेखन आरम्भ किया। लेखन के साथ-साथ ‘हिंदीपरिषद की अन्य गतिविधियों, गोष्ठियों, अभिनय, अध्यापन तथा समाज सेवा में जुड़ीं जिससे आप साहित्य-सृजन की ओर अग्रसित हुईं।
4.भाषाओं का ज्ञान : गुजराती, हिंदी अंग्रेज़ी और फ्रेंच।
5.आपकी रचनाओं में नारी विमर्श, नारी के प्रति अत्याचार, नारी शक्ति, आधुनिक नारी तथा उसके अधिकार आदि भाव उजागर होते हैं।